Elon Musk Grok AI controversy

एलन मस्क, Grok AI और नया पूंजीवाद

 

विरोध से भी मुनाफा कमाने की रणनीति

सचिन श्रीवास्तव
Elon Musk Grok AI controversyएलन मस्क को जो लोग महज एक टेक उद्यमी मान रहे हैं, वे एक बड़ी खमख्याली में हैं। असल में मस्क नए पूंजीवाद के सबसे चमकते प्रतीक हैं। वे खुद को फ्री स्पीच (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) के रक्षक के रूप में पेश करते हैं, लेकिन उनकी कंपनियां “विरोध के प्रोडक्ट से मुनाफा कमाने” के सिद्धांत पर चलती है।

इन दिनों मस्क की कंपनी xAI द्वारा विकसित Grok AI भारत में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई भाजपा और मोदी विरोधियों को यह AI निष्पक्ष और सत्ता के खिलाफ बोलने वाला लग रहा है, लेकिन यह असल में मस्क की कुटिल पूंजीवादी रणनीति का ही हिस्सा है। इस तथ्य को परखने के लिए हमें तीन सवालों से जूझना जरूरी है। पहला है, क्या Grok AI सच में निष्पक्ष है? दूसरा, एलन मस्क का नया पूंजीवाद और विरोध से मुनाफा कमाने की रणनीति और तीसरा, भाजपा और मोदी विरोधियों का भ्रम।

Grok की निष्पक्षता
Grok एक जनरेटिव AI चैटबॉट है, जो ChatGPT, Google Gemini और Claude AI की तरह भाषा मॉडल पर आधारित है। इसे इंसानों के साथ संवाद करने और जानकारी देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह X (पहले ट्विटर) से डेटा लेकर जवाब देता है, जिससे इसे “रियल टाइम” जानकारी मिलती है। यह X पर चल रहे ट्रेंड्स और पोस्ट से डेटा खींच सकता है, जिससे इसका जवाब अन्य AI की तुलना में ज्यादा अपडेटेड होता है। क्योंकि अन्य एआई को वेब टूल का उपयोग करना पड़ता है।

हालांकि इसके कारण Grok कम विश्वसनीय भी है, क्योंकि ट्वीटर की जानकारी पर सत्यता की कोई जांच नहीं की जाती है, जबकि OpenAI और Google जेमिनी के मॉडल आमतौर पर तथ्यों की जांच करने में समक्ष हैं। ग्रोक की एक खासियत यह भी है कि यह “सनकी” और “विद्रोही” टोन में जवाब देता है। एलन मस्क ने खुद इसे लान्च करने के बाद कहा था कि यह थोड़ा “rebellious” (बागी) और “मज़ाकिया” अंदाज में जवाब देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

मस्क का यह भी दावा है कि ग्रोक को कम सेंसर किया गया है, जिससे यह विवादास्पद या सत्ता विरोधी जवाब देने से नहीं हिचकता। तो असल में यह फ्री स्पीच का झंडाबरदार नहीं है, बल्कि यह अनफ़िल्टर्ड AI है। आप देखेंगे कि Grok-1 से Grok-3 तक इसे लगातार अपडेट किया जा रहा है, जिससे इसका जवाब देने का तरीका भी बदल रहा है।

Grok का सत्ता विरोध
Elon Musk Grok AI controversyभारत में कई लोगों को लग रहा है कि Grok मोदी सरकार और भाजपा के खिलाफ बोलने वाला AI है। कुछ भाजपा समर्थकों ने इसे “एंटी-इंडिया” AI करार दिया, तो कई विपक्षी समर्थकों ने इसे “सच बोलने वाली मशीन” बता दिया। लेकिन सच्चाई इससे कहीं अधिक जटिल है। Grok का डेटा सोर्स X (ट्विटर) है, और ट्विटर पर विपक्षी नैरेटिव ज्यादा मजबूत हैं। आमतौर पर पूरी दुनिया में ट्विटर पर सत्ता विरोधी नैरेटिव को तरजीह दी जाती है।

सरकार विरोधी पत्रकार, एक्टिविस्ट और आम लोगों के विचार ट्विटर पर खुलकर आते हैं, क्योंकि मुख्यधारा की मीडिया में उनकी जगह नहीं बची है। अगर AI इन्हीं डेटा पॉइंट्स को प्राथमिकता देगा, तो स्वाभाविक रूप से वह सत्ता-विरोधी दिख सकता है। इसलिए AI की निष्पक्षता उसके अपने ट्रेनिंग डेटा पर निर्भर है और अल्गोरिदम से नियंत्रित होती है। इसे समझना जरूरी है।

AI को जिस डेटा से ट्रेन किया जाता है, वही उसके जवाबों को प्रभावित करता है। अगर ट्रेनिंग डेटा में सरकार की आलोचना ज्यादा है, तो AI स्वाभाविक रूप से सत्ता-विरोधी झुकाव वाला लगेगा। दूसरे Grok की “सनकी” स्टाइल और “सत्ता विरोध” एक मार्केटिंग भी है। इन दिनों इंटरनेट पर कई किस्म के एआई हैं, लेकिन उनके बीच अगर ग्रोक को जगह बनानी थी, तो इसके लिए खुद को अलग दिखाना भी जरूरी था। ऐसे में एलन मस्क के लिए Grok का थोड़ा “rebellious” दिखना फायदेमंद है, क्योंकि इससे वह चर्चा में रहता है। अगर विद्रोह को लोग पसंद कर रहे हैं, तो इसका ज्यादा इस्तेमाल करेंगे और X का एंगेजमेंट बढ़ेगा, जिससे उनका बिजनेस मजबूत होगा।

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मस्क: टेक्नोलॉजी के जीनियस या पूंजीवाद के मास्टरमाइंड?
Elon Musk Grok AI controversyएलन मस्क को कई लोग क्रांतिकारी इनोवेटर मानते हैं, जिन्होंने Tesla, SpaceX, Neuralink जैसी कंपनियों से दुनिया बदल दी। लेकिन उनका असली टैलेंट सिर्फ इनोवेशन में नहीं, बल्कि “विरोध से भी मुनाफा कमाने” की कला में है।

पूंजीवाद ने हमेशा विरोध को भी एक प्रोडक्ट बना दिया है। और यह सत्ता के लिए मुफीद होता है। दुनियाभर में इस समय सत्ताओं के खिलाफ लोग बेचैन हैं, लेकिन उनकी बेचैनी सड़कों पर दिखाई न दे, इसके लिए सोशल मीडिया में पर्याप्त बंदोबस्त किया जाता रहा है। इस तरह से तकनीक अपने वृहद स्वरूप में सत्ता के संरक्षण का ही काम कर रही है। हालांकि जब यही तकनीक सड़कों पर उतरे लोगों का टूल बनती है, तो इसके फायदे भी हैं, लेकिन कोरी तकनीक सिर्फ कीबोर्ड पर उलझी उंगलियां सत्ता के लिए मुफीद हैं।

इसमें मुनाफा पर्याप्त है। जब अमेरिकी कंपनियों को दक्षिणपंथी नैरेटिव से फायदा होता है, तो वे उनकी बातें बढ़ावा देती हैं। जब विरोधी विचार ट्रेंड करने लगते हैं, तो उन्हें भी एक बाज़ार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

मस्क, मजाक और मनी
मस्क ने Grok को इस तरह से डिजाइन करवाया है कि यह परंपरागत सोच से हटकर जवाब देता है। जो इसे बागी बनाता है, लेकिन यह सीमित ही है। यह आखिरकार सत्ता समर्थक AI ही है, जो कुछ आलोचनात्मक नजरिए रखता है। कई बार इसके जवाबों में व्यंग्य या तंज ज्यादा होता है, क्योंकि सत्ता-विरोधी लोग इसे पसंद कर सकते हैं। दूसरे, इस दौर में कॉमेडी ही एक जरिया है, जिसके जरिये सत्ताओं का विरोध किया जा सकता है। इसका लाभ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कई कंपनियां उठा रही हैं।

मस्क भी यही कर रहे हैं। X पर हेट स्पीच और ट्रोलिंग की छूट दी है, ताकि विवाद बना रहे और Grok को “सत्ता विरोधी” दिखाकर एंगेजमेंट बढ़ा रहे हैं। एक तरफ, ट्रंप और दक्षिणपंथी लॉबी से नजदीकी बढ़ाकर नई बिजनेस डील पक्की कर रहे हैं, तो वहीं Grok के जरिए “फ्री स्पीच” का बिजनेस मॉडल भी खड़ा किया जा रहा है।

सेंटर फॉर काउंटरिंग डिजिटल हेट – CCDH के मुताबिक, X पर इस्लामोफोबिया, जातीय नफरत, नारी विरोधी पोस्ट और नस्लीय हमले बढ़े हैं, लेकिन इस पर मस्क चुप रहते हैं। नफरती ट्रेंड्स जैसे “लव जिहाद”, “किलिंग स्प्री”, “रिवेंज अगेन्स्ट X कम्युनिटी” वगैरह को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा पर भी मस्क के X ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए, जिससे कई एक्टिविस्ट और संगठनों ने इसका बहिष्कार किया।

मस्क ने अमेरिका और यूरोप में कई सरकारों की आलोचना की, लेकिन भारत, सऊदी अरब, चीन जैसे देशों की सरकारों के खिलाफ X पर ज्यादा सख्त नीति नहीं अपनाई। भारत में सरकार समर्थकों को ज्यादातर “फ्री स्पीच” के नाम पर खुला मैदान मिलता है, लेकिन विरोधियों पर कार्रवाई होती है। कई सरकारों के दबाव में X ने अकाउंट सस्पेंड भी किए, इनमें कुछ एक्टिविस्ट और पत्रकारों के अकाउंट भी शामिल हैं।

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Grok AI सत्ता-विरोधी स्वर दिखाता है, लेकिन X पर सत्ता-समर्थक हेट स्पीच को छूट मिलती है— यह एक विरोधाभास है। इससे मस्क की “फ्री स्पीच” पॉलिसी का राज खुल जाता है। असल में वे निष्पक्ष नहीं हैं, सिर्फ अपने बिजनेस और राजनीतिक झुकाव के हिसाब से अपने प्रॉडक्ट को चलाते हैं।

मस्क जानते हैं कि Grok AI अगर “सत्ता-विरोधी” लगता है, तो विपक्षी इसे ज्यादा इस्तेमाल करेंगे। अगर भाजपा समर्थक इसे “भारत-विरोधी” कहते हैं, तो ज्यादा लोग इसे ट्राय करेंगे। विवाद से ट्रैफिक बढ़ता है और X पर विज्ञापनदाताओं की कमाई भी।

एलन मस्क नए दौर के पूंजीवाद (Surveillance Capitalism) का चेहरा हैं, जहां “विरोध भी प्रोडक्ट” है और हर विचारधारा से पैसा कमाने का जरिया निकाला जाता है।मस्क अब डोनाल्ड ट्रंप के करीबी दिख रहे हैं, क्योंकि उन्हें अमेरिका के दक्षिणपंथी समर्थकों से फायदा मिल रहा है। उन्होंने X पर ट्रंप का अकाउंट बहाल कर दिया, जबकि फेसबुक और यूट्यूब ने ट्रंप को कुछ समय के लिए बैन किया था।

ट्रंप और अमेरिकी दक्षिणपंथी “फ्री स्पीच” के नाम पर नस्लवादी, स्त्री विरोधी और मुस्लिम विरोधी नैरेटिव को खुला छोड़ने की मांग करते हैं, और मस्क इसमें शामिल दिखते हैं। अगर मस्क हेट स्पीच के खिलाफ सख्त AI मॉडरेशन लागू करते हैं, तो यह ट्रंप और उनके समर्थकों को नाराज कर सकता है, जिससे मस्क को राजनीतिक और आर्थिक नुकसान हो सकता है।

मस्क चाहें तो AI से हेट स्पीच रोक सकते हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि इससे उनका बिजनेस मॉडल कमजोर होगा। वे मॉडरेशन AI को हेट स्पीच और झूठी खबरों को ऑटोमैटिक ब्लॉक करने के लिए ट्रेन्ड कर सकते हैं, जिससे हेट-स्पीच फैलाने वाले अकाउंट्स पर स्वतः प्रतिबंध लग जाएगा, लेकिन मस्क ऐसा करने में रुचि नहीं रखते, क्योंकि— उनका बिजनेस मॉडल “फ्री स्पीच” के नाम पर विवादों को बढ़ावा देने पर टिका है।

X को बदलकर “सबकुछ ऐप” (Everything App) बनाने का उनका सपना है, जिसमें सोशल मीडिया + AI + फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन + वीडियो कंटेंट सबकुछ हो। वे X को दक्षिणपंथी “फ्री स्पीच प्लेटफॉर्म” बनाकर ट्रंप और अन्य सरकारों से राजनीतिक फायदा लेना चाहते हैं। साथ ही भारत जैसे देशों में भी वे सरकारों से अच्छे संबंध बनाए रखना चाहते हैं, ताकि X पर कोई बड़ा प्रतिबंध न लगे और Tesla जैसी कंपनियों को फायदा मिले।

भाजपा और मोदी विरोधियों का भ्रम
भाजपा विरोधी लोगों को Grok इसलिए निष्पक्ष लग रहा है क्योंकि वह मोदी सरकार और मुख्यधारा की मीडिया की आलोचना कर रहा है। यह अपने आप में ही हास्यास्पद है, किसी का विरोध निष्पक्षता का प्रमाण नहीं हो सकता है। Grok का थोड़ा आलोचनात्मक रुख इसलिए भी लग रहा है क्योंकि सत्ता-विरोधी आवाज़ें ट्विटर पर ज्यादा प्रभावी हैं। साथ ही इस AI की जवाब देने की शैली और मार्केटिंग इसे “बोल्ड” दिखाने के लिए ही डिजाइन की गई है।

असल में, Grok न तो सत्ता-विरोधी है और न ही निष्पक्ष। यह पूंजीवादी रणनीति का एक नया रूप है, जो विरोध को भी एक बाजार में बदल देता है। एलन मस्क की असली रणनीति विवादों को भुनाकर अपनी कंपनियों का विस्तार करना है। Grok, X और मस्क का पूरा बिजनेस मॉडल “फ्री स्पीच” और “विरोध” को कैश करने पर आधारित है।